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Investment Tips: कहां निवेश करने पर पैसे हो जाएंगे डबल, जानिए निवेश का फॉर्म्यूला

Investment Tips: आप शेयर मार्केट, म्यूचुअल फंड या किसी सरकारी योजना में निवेश करें। जिससे पैसे फटाफट डबल हो जाएं। देखिए कुछ खास स्कीम

Investment Tips: आमतौर कोई भी निवेशक वहीं पैसे लगाते हैं, जहां उन्हें जोखिम कम और शानदार रिटर्न मिले। शेयर बाजार में जोखिम सबसे ज्यादा होता है। यहां कब पैसे पैसे दोगुना, तीन गुना चार गुना हो जाएं। कुछ पता नहीं है। शेयर बाजार और निवेश करें में कब आपको झटका लग जाए। इसका भी कोई अनुमान नहीं है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर कहां निवेश करें। जिससे पैसे भी डबल हो जाएं और जोखिम भी काफी कम रहे।

अगर आप सुरक्षित निवेश की तलाश में है तो फिक्स्ड डिपॉजिट, पीपीएफ, सुकन्या समृद्धि योजना, किसान विकास पत्र (केवीपी), नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (एनएससी) और नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) जैसी तमाम योजनाओं में पैसे जमा कर सकते हैं। यहां बेहतर ब्याज दर मिलती है।

निवेश के लिए अपनाएं यह फॉर्म्यूला

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अगर आप जानना चाहते हैं कि आपके पैसे को डबल होने में कितना समय लगेगा तो आप रूल ऑफ 72 फॉर्म्यूला अपना सकते हैं। अब सवाल यह उठता है कि आखिर यह कौन सा फॉर्म्यूला है? हम आपको इस फॉर्म्यूला के बारे में भी विस्तार से बताएंगे। इसे जानते ही आप समझ जाएंगे कि आपके पैसे को डबल होने में कितना समय लगेगा। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस फॉर्म्यूले के तहत आपको मिल रहे ब्याज को 72 से भाग देना होगा। मान लीजिए, आपने 4 फीसदी सालाना ब्याज दर है। ऐसे में आपको 72 में 4 का और निवेश करें भाग देना होगा। इसका रिजल्ट 18 आएगा। इसका मतलब ये हुआ कि आपके पैसे को डबल होने में 18 महीने लगेंगे।

यहां कर सकते हैं निवेश

सुकन्या समृद्धि योजना: यह सरकारी स्कीम है। इसे खासतौर से बेटियों के लिए शुरू किया गया है। अगर आप अपनी बेटी के नाम पर सुकन्‍या खाता खुलवाते हैं तो 9.4 साल में आपका पैसा दोगुना हो जाएगा। मौजूदा समय में सुकन्‍या योजना में सालाना 7.6 फीसदी की दर से ब्‍याज मिल रहा है।

बैंक FD: रिजर्व बैंक के रेपो रेट बढ़ाने के बाद ज्यादातर बैंक अपनी एफडी की ब्‍याज दरों में भी बढ़ोतरी कर रहे हैं। इस समय एफडी पर औसतन 6 फीसदी का ब्‍याज मिल रहा। ऐसे में यहां आपका पैसा डबल होने में करीब 12 साल लग जाएंगे।

PPF: पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी PPF भी निवेश के लिए बेहतर विकल्प है। इस पर अभी सालाना 7.1 फीसदी दर से ब्याज मिल रहा है। लिहाजा इसमें आपके पैसे दोगुना होने में 10.14 साल लगेंगे।

किसान विकास पत्र: किसान विकास पत्र योजना भी निवेश के लिहाज से बेहतर है। अभी इस योजना में सालाना 6.9 फीसदी की दर से गारंटीड ब्‍याज दर मिल रही है। ऐसे में 10.43 साल में आपके पैसे डबल हो जाएंगे।

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First Published: Aug 24, 2022 10:52 AM

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Mutual Funds: म्यूचुअल फंड में निवेश के दौरान कैसे करें एसेट एलोकेशन? जानिए एक्सपर्ट्स की राय

Mutual Funds: म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय निवेशक को यह पता होना चाहिए कि कितना निवेश करना है और कितना जोखिम उठाना है.

Mutual Funds: म्यूचुअल फंड में निवेश के दौरान कैसे करें एसेट एलोकेशन? जानिए एक्सपर्ट्स की राय

म्यूचुअल फंड (MF) में निवेश का फायदा यह है कि एक निवेशक को पहले से तैयार डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो मिलता है.

Mutual Funds: म्यूचुअल फंड (MF) में निवेश का फायदा यह है कि एक निवेशक को पहले से तैयार डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो मिलता है. इसमें किए गए निवेश को प्रोफेशनल फंड मैनेजर्स द्वारा मैनेज किया जाता है. ऐसे में म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय निवेशकों को जोखिम को कम करने के लिए डायवर्सिफिकेशन की चिंता करने की जरूरत नहीं है. हालांकि, म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय निवेशक को यह पता होना चाहिए कि कितना निवेश करना है और कितना जोखिम उठाना है. निवेशकों के लिए अपनी जोखिम उठाने की क्षमता को पहचानना जरूरी है.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

Quantum AMC की चीफ बिजनेस ऑफिसर रीना नथानी ने कहा, “म्यूचुअल फंड स्कीम की सभी कैटेगरी और सब-कैटेगरी रिस्क-रिटर्न स्पेक्ट्रम पर एक अलग स्थान रखती है. निवेशकों को स्कीम के निवेश और इसके रिस्क-रिटर्न को अच्छी तरह से समझना चाहिए. ऐसी स्कीम्स चुनें जो आपके रिस्क प्रोफ़ाइल, इन्वेस्टमेंट ऑब्जेक्टिव, टाइम हॉरिजोन से मेल खाती हों और संबंधित फाइनेंशियल गोल के लिए सबसे उपयुक्त हों.” नथानी ने आगे कहा, “यह देखते हुए कि महंगाई बढ़ रही है, एफिशिएंट इन्फ्लेशन-एडजस्टेड रिटर्न (जिसे रियल रिटर्न के रूप में भी जाना जाता है) अर्जित करना जरूरी है. इस तरह, परीक्षण किए गए 12-20-80 एसेट एलोकेशन मॉडल का व्यापक रूप से पालन करना सार्थक होगा, जो आपकी सभी निवेश आवश्यकताओं के लिए एक सरल समाधान है. इसलिए, म्यूचुअल फंड के माध्यम से निवेश के मामले में भी बाजार के जोखिम को और कम करने के लिए एसेट एलोकेशन किया जा सकता है.

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कैसे करें एसे एलोकेशन?

नथानी ने बताया, “एक अलग बचत खाते और/या एक लिक्विड फंड (जो आपकी आपातकालीन जरूरतों का ख्याल रखेगा) में 12 महीने के नियमित खर्चों (ऋणों पर ईएमआई सहित) को लगाएं. पूरे पोर्टफोलियो का लगभग 20 प्रतिशत निवेश सोना (गोल्ड फंड्स या गोल्ड ईटीएफ के माध्यम से) में रखें, जिससे आप अपने पोर्टफोलियो को बेहतर तरीके से डायवर्सिफाई कर सकें. शेष 80 प्रतिशत पोर्टफोलियो, इक्विटी म्यूचुअल फंड की अलग-अलग सब-कैटेगरी में निवेश करें, जो आपको संभावित रूप से महंगाई को मात देने और अनुमानित वित्तीय लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करेगा. यह एसेट एलोकेशन स्ट्रेटेजी संभावित रूप से आपके पोर्टफोलियो को स्टेबिलिटी, ग्रोथ और प्रोटेक्शन प्रदान कर सकती है.”

म्यूचुअल फंड में ग्रोथ और डिविडेंड ऑप्शन क्या होते हैं? किसमें करें निवेश

ग्रोथ का ऑप्शन उन इन्वेस्टर के लिए सही होता है जो लॉन्ग टर्म के लिए इन्वेस्टमेंट करना चाहते हैं। इसकी वजह यह है कि इन्वेस्टर को रिटर्न पर कैपिटल गेंस नहीं देना पड़ता है। वहीं दूसरी ओर लॉन्ग टर्म में रिटर्न में बढ़ोतरी भी होता है।

नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में इन्वेस्टमेंट करने वाले लोग हमेशा उन तरीकों को अपनाना चाहते हैं जिस पर अधिक से अधिक रिटर्न मिल सके। इसी तरह म्यूचुअल फंड के इन्वेस्टमेंट ग्रोथ और डिविडेंड के विकल्प को लेकर अक्सर उलझन में रहते हैं। वही इस आर्टिकल के माध्यम से यहां ग्रोथ और डिविडेंड के विकल्प के बारे में बात कर रहें है। जिससे आपको स्कीम में इन्वेस्टमेंट करते वक्त सही फैसला लेने में मददगार साबित होगा।

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ग्रोथ ऑप्शन

सबसे पहले आइए समझते हैं कि ग्रोथ ऑप्शन में क्या होता है। मान लीजिए कि किसी ने 10 रुपये की NAV प्राइस पर 100 यूनिट खरीदी है। साथ ही, उन्होंने कुल 1 हजार रुपये निवेश किए। वहीं 5 साल बाद अगर उस NAV की वैल्यू 30 रुपये हुई तो उसे एक NAV पर 20 रुपये का फायदा होगा। और निवेश करें यानी की अब उसे कुल फायदा 2 हजार रुपये का हुआ है।

बता दें कि ग्रोथ का ऑप्शन उन इन्वेस्टर के लिए सही होता है, जो लॉन्ग टर्म के लिए इन्वेस्टमेंट करना चाहते हैं। इसकी वजह यह है कि इन्वेस्टर को रिटर्न पर कैपिटल गेंस नहीं देना पड़ता है। वहीं, दूसरी ओर लॉन्ग टर्म में रिटर्न में बढ़ोतरी भी होता है। इसलिए सिक्योरिटी खासकर शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है।लॉन्ग टर्म में रिटर्न पर इस उतार-चढ़ाव का असर कम देखने को मिलता है। वहीं, ग्रोथ के ऑप्शन में निवेशक को कंपाउंडिंग का भी अच्छा फायदा मिल सकता है। इसलिए यह ऑप्शन उन इन्वेस्टर के लिए सही होता है, जिन्हें अपने निवेश पर नियमित आय नहीं चाहिए।

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डिविडेंड ऑप्शन

इसके अलावा दूसरा ऑप्शन डिविडेंड ऑप्शन होता है। इसमें आपको रेगुलर इंटरवल पर डिविडेंड इनकम मिलता है। वहीं, यह कितना मिलता है और कितने इंटरवल पर और निवेश करें मिलता है, यह पहले से फिक्स नहीं होता है। साथ ही, डिविडेंड ऑप्शन में NAV का ग्रोथ कम देखा जाता है। उदाहरण के लिए A ने 10 रुपए के NAV पर 1000 यूनिट खरीदारी किया है तो उसका कुल इन्वेस्टमेंट 10 हजार रुपये हुआ। वहीं, एक साल के भीतर यही NAV बढ़कर 15 रुपये हो जाता है तो फंड हाउस ने प्रति NAV 2 रुपये डिविडेंड के रूप में देने का फैसला किया है। जबकि एक साल के बाद यह NAV महज 13 रुपए रह जाता है। लेकिन अगर यह ग्रोथ ऑप्शन होता तो NAV की वैल्यू एक साल बाद 15 रुपये होती। साथ ही यह ऑप्शन ऐसे निवेशकों के लिए सही है, जो शॉर्ट टर्म के लिए म्यूचुअल फंड की स्कीम में पैसा लगाना चाहते हैं।

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Investment Tips : विदेशी शेयर बाजार में पैसा लगाने से पहले समझें जरूरी बातें, फिर यूं करें शुरुआत

विदेशी बाजार में पैसा लगाने से पहले कुछ जरूरी बातें जरूर समझ लें.

विदेशी बाजार में पैसा लगाने से पहले कुछ जरूरी बातें जरूर और निवेश करें समझ लें.

निवेशक जागरूक हुए हैं और डायवर्सिफिकेशन के लिए विदेशों बाजारों में पैसा लगाना पसंद कर रहे हैं. आरबीआई के आंकड़ों को देखें तो विदेशों में भारतीयों को निवेश काफी बढ़ गया है. विदेशी बाजार में पैसा लगाने से पहले कुछ जरूरी बातें जरूर समझ लें.

  • News18Hindi
  • Last Updated : October 24, 2022, 17:30 IST

हाइलाइट्स

भारत के लोगों का विदेशी बाजारों में निवेश लगाता बढ़ रहा है.
तकनीक ने ओवरसीज़ निवेश करना काफी आसान बना दिया है.
भारत में कई म्यूचुअल फंड हाउस विदेशी निवेश का विकल्प मुहैया कराते हैं.

नई दिल्ली. निवेशक इन दिनों विदेशी शेयरों में भी निवेश कर रहे हैं. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के आंकड़ों के हिसाब से 2021-22 में भारतीयों ने 19,611 मिलियन डॉलर का निवेश विदेशी बाजारों में किया है. इससे पिछले साल यह महज 12,684 मिलियन डॉलर था.

भारत सरकार की लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत एक भारतीय एक वित्त वर्ष में 2,50,000 (ढाई लाख) डॉलर विदेश भेज सकता है. रिजर्व बैंक ने समय के साथ इस सीमा में बढ़ोतरी की है. साल 2004 में जब यह स्कीम शुरू हुई थी, तब इसकी सीमा महज 25 हजार डॉलर थी. म्यूचुअल फंड में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निवेश करना आसान हो गया है. इसका प्रोसेस कुछ यूं है…

यहां एक महत्वपूर्ण बात ये है, चूंकि आपने भारतीय रुपये में निवेश किया है तो यह निवेश LRS के तहत कवर नहीं होते हैं. ACE MF के आंकड़ों को देखा जाए तो 15 अक्टूबर तक ऐसी 63 स्कीमें बाजार में मौजूद थीं, जो विदेशों में निवेश कराती हैं. इनमें निवेश लगातार बढ़ रहा है.

विदेशों में निवेश करना आसान
हेक्सागन वेल्थ के हेक्सागन कैपिटल एडवाइजर्स के प्रबंध निदेशक श्रीकांत भागवत कहते हैं कि इसका एक बड़ा कारण जागरूकता का बढ़ा है. भागवत मनीकंट्रोल के सिंपली सेव पॉडकास्ट में बतौत मुख्य अतिथि शामिल हुए थे. उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में, कई मंच सामने आए हैं, जिससे भारतीय निवेशकों के लिए न केवल विदेशों में निवेश करना आसान हो गया है, बल्कि वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों के विकास में भाग लेना भी संभव हो गया है, जिनके उत्पादों और ऑफरिंग्स का उपयोग हम लगभग हर दिन करते हैं, जैसे कि Apple, Alphabet (Google), Facebook इत्यादि. भागवत कहते हैं, “इन सबसे ऊपर, इकोसिस्टम की उपलब्धता के साथ हमने पिछले एक दशक में अमेरिकी बाजार में एक शानदार तेजी देखी है, जिसने हर किसी का ध्यान खींचा है.”

कैसे लगाएं विदेशी बाजारों में पैसा
श्रीकांत भागवत ने बताया कि आपको डायवर्सिफिकेशन को ध्यान में रखना चाहिए, न कि अतिरिक्त पैसा बनाने के बारे में. और यदि आप डायवर्सिफिकेशन पर ध्यान केंद्रित रखते हैं तो आपको सभी जियोग्राफिक्स को देखना होगा. आप सिर्फ अमेरिकी इक्विटी बाजारों को ही क्यों देख रहे हैं? दुनियाभर में कई अच्छे बिजनेस हैं. तो आपको सभी बाजारों को देखना चाहिए.

यदि आप कंपनियों के बारे में रिसर्च कर सकते हैं तो अच्छी कंपनियां खोजकर सीधे उनके स्टॉक लेने चाहिएं. परंतु यदि आप नहीं कर सकते हैं तो आपको पैसिवली मैनेज्ड (इंडेक्स) फंड्स पर फोकस करना चाहिए. निवेश करते समय गलती की गुंजाइश नहीं होती. हर गलती का बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ता है. यदि आप पहली बार निवेश कर रहे हैं तो सीधा विदेशों बाजारों पर ध्यान न लगाएं. आपको पहले भारतीय बाजारों में मौजूद म्यूचुअल फंड्स में निवेश करना चाहिए. जैसे-जैसे आपकी समझ बढ़ेगी, आप विदेशों के इंडेक्स को समझने लगेंगे और वहां निवेश करना आपके लिए आसान हो जाएगा. अपने पोर्टफोलियो का 10-15 फीसदी पैसा विदेशी बाजारों में लगाना चाहिए.

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Investment Tips: अगर आपकी सैलरी 30 से 50 हजार मंथली है तो ऐसे करें फाइनेंशियल प्लानिंग, बचत को इन माध्यमों में निवेश करें

Investment Tips: अगर आपकी सैलरी 30 से 50 हजार मंथली है तो ऐसे करें फाइनेंशियल प्लानिंग, बचत को इन माध्यमों में निवेश करें Investment Tips If your salary is 30 to 50 thousand monthly then do financial planning like this invest savings in these mediums

Alok Kumar

Edited By: Alok Kumar @alocksone
Updated on: September 08, 2022 16:23 IST

Investment tips - India TV Hindi News

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Highlights

  • प्लानिंग:पहली सैलरी से ही करें इन्वेस्टमेंट की शुरुआत
  • नौकरी पेशा वर्ग के लिए रिटायरमेंट प्लानिंग करना बहुत जरूरी
  • अपने हिसाब से सही जगह निवेश करना चाहिए

Investment Tips: नौकरी पेशा वर्ग की हमेशा शिकायत रहती है कि वह अपने और परिवार के भविष्य की जरूतरों के लिए सही तरीके से बचत और निवेश नहीं कर पा रहा है। अगर आप भी उन लोगों में शामिल हैं जो बढ़ती महंगाई से परेशान हैं और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के निवेश करना चाहते हैं तो चिंता करने की जरूरत नहीं है। अगर आपकी सैलरी 30 से 50 हजार रुपये मंथली है तो हम आपको वित्तीय प्लानिंग के साथ इनवेस्टमेंट की सटीक जानकारी दे रहे हैं। साथ ही यह भी बता रहे हैं कि आपको कम से कितने रुपया का बचत प्रति महीना करना चाहिए।

सैलरी का 20 से 25 फीसदी बचत करें

फाइनेंशियल प्लानर जितेंद्र सोलंकी का कहना है कि किसी भी नौकरी पेशा वाले लोग को अपनी सैलरी में से प्रति महीना 20 से 25 फीसदी रकम बचत करना चाहिए। अगर, सैलरी 50 हजार रुपये है तो कम से कम 10,000 रुपये प्रति महीना बचत करना चाहिए। हालांकि, जिनकी सैलरी कम है उनके लिए थोड़ी मुश्किल हो सकती और निवेश करें है। ऐसे लोगों को एकस्ट्रा इनकम जनरेट करने पर विचार करना चाहिए।

रिटायरमेंट के लिए PPF और एनपीएस में करें निवेश

पब्लिक प्रोविडेंट फंड पर वर्तमान में 7.1 फीसदी की दर से ब्याज मिल रहा है। ब्याज दर की गणना तिमाही आधार पर होता है। वहीं, नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) पर 8 से लेकर 10 फीसदी का रिटर्न मिलता है। दोनों स्कीम पर आयकर छूट मिलती है। अगर आप पीपीएम में निवेश करते हैं तो आयकर की धारा 80सी के तहत 1.5 लाख रुपये की छूट ले सकते हैं। वहीं, एनपीएस पर आपको 50 हजार रुपये की अतिरिक्त छूट मिल जाती है।

इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम्स में निवेश

अगर आपकी सालाना आय टैक्सेबल है तो इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम्स (ELSS) शानदार निवेश स्कीम है। इस स्कीम में 80 फीसदी तक इक्विटी में निवेश किया जाता है, जिसके चलते अच्छा रिटर्न मिलता है। इसके लिए मिनिमम 3 सालों का लॉक-इन पीरियड होता है और इसमें निवेश करने पर सेक्शन 80सी के तहत डिडक्शन का लाभ मिलता है। निवेश की अवधि ज्यादा होने के कारण नेगेटिव रिटर्न की संभावना कम होती है।

म्युचुअल फंड में निवेश

आज के समय में सैलरी से निवेश करने का सबसे अच्छा आप्शन म्यूचुअल फंड है। इसमें आप एसआईपी के जरिये अपनी सुविधा अनुसार निवेश कर सकते हैं। हालांकि, कभी भी निवेश करने से पहले अपनी कमाई और फाइनेंशियल गोल का जरुर ध्यान रखें। वहीं, किसी भी स्कीम में निवेश से पहले पूरी जानकारी जरूर जुटा लें। लंबी अवधि में आप म्यूचुअल फंड निवेश से शानदार रिटर्न प्राप्त कर सकते हैं।

फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश

अगर आप बिल्कुल जोखिम लेना नहीं चाहते हैं तो फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में निवेश कर सकते हैं। पांच साल के एफडी पर टैक्स छूट भी मिलती है। हालांकि, अभी इस पर ब्याज काफी कम मिल रहा है। हाल के दिनों में बैंकों ने एफडी पर ब्याज बढ़ाना शुरू किया है। आने वाले दिनों में इस पर भी आपको 6 से 8 फीसदी का रिटर्न मिलना शुरू हो सकता है। फिक्स्ड डिपॉजिट निवेश का परंपरागत साधन है. हालांकि, इसपर काफी कम रिटर्न मिलता है। इसके मुकाबले पब्लिक प्रोविडेंट फंड, नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट जैसे स्मॉल सेविंग स्कीम्स पर रिटर्न ज्यादा मिलता है।

इमरजेंसी फंड जरूर बनाएं

रिटायरमेंट के लिए पैसा जोड़ने के अलावा नौकरी जाने जैसी आपातकालीन स्थितियों के लिए भी इमरजेंसी फंड जरूर बनाएं। यह इमरजेंसी फंड आपके कम से कम 5 से 6 महीने के सैलरी के बराबर होना चाहिए। इससे आपको बुरे वक्त से निपटने में मदद मिलेगी।

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